जाने भारत के बजट निर्माण की प्रक्रिया क्या है

जैसे कि आप जानते हैं कोई भी व्यक्ति अपने छोटे, बड़े काम या कोई भी खर्चे या निवेश का एक बजट (Budget) बना कर ही करता है। आप भी बजट (Budget) बारे में जानना चाहते हो तो इस आर्टिकल द्वारा बजट क्या है? भारत में बजट निर्माण की प्रक्रिया कैसे होती है?

बजट की परिभाषा Definition of budget

बजट बनाना ये एक योजना है। कि आप अपना पैसा कैसे खर्च करते है। आप तय करते हैं कि आप किन-किन चीजों पर पैसा खर्च कर सकते हैं और आपको प्रत्येक चीज़ पर कितना पैसा खर्च करने की जरूरत है। इसी प्रकार सरकार देश चलाने के लिए एक बजट बनाती है। देश का बजट वित्त विभाग (Financial Department) द्वारा बनाया जाता है।

देश के बजट में फण्ड GST (Goods and Services Tax) इनकम टैक्स (Income Tax) कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax) आदि संस्थानों से वित्त विभाग में फण्ड आता है। इस पैसे का उपयोग देश के लिए बजट बनाने के लिए करते हैं।

बजट एक निश्चित समय पर लागू होता है। जो 1 फरवरी को हर साल वित्त मंत्री (Finance Minister) लेकर आते है। ये बजट एक वर्ष के लिए होता है। इस बजट को 1 अप्रैल से लागू कर दिया जाता है, जो 31 मार्च तक रहता है |

भारत में बजट निर्माण की प्रक्रिया कैसे होती है? 

किसी भी देश में बजट बनाना एक लंबी और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है और भारत में इसमें काफी समय लगता है। भारत में बजट बनाने की प्रक्रिया में कई अलग-अलग चरण होते हैं, और आपको नीचे हर एक चरण के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।

भारत मे बजट निर्माण करने की प्रक्रिया निम्न प्रकार है–

1. अनुमानों का विवरण 

भारत में, वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है और 31 मार्च को समाप्त होता है। हर विभाग अप्रैल की शुरुआत में अपनी आय-खर्च रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर देता है। ऐसा करने के लिए, वे एक दूसरे विभाग को एक फॉर्म भेजते हैं, जिसमें यह जानकारी मांगी जाती है कि उन्होंने पिछले वर्ष में क्या पैसा खर्च किया था।

2. अनुमानों का विभागीय परीक्षण 

सरकार अलग-अलग हिस्सों द्वारा तैयार किए गए बजट अनुमानों को यह सुनिश्चित करने के लिए देखा जाता है कि वे सटीक हैं की नहीं। यह विभाग के मुख्यालय के नियंत्रक (Controller) अधिकारी द्वारा किया जाता है, जो आवश्यकता पड़ने पर कोई परिवर्तन या संशोधन करता है। इसके बाद विभाग का बड़ा अधिकारी संशोधित अनुमान वित्त मंत्रालय को भेजता है।

3. वित्त मंत्रालय द्वारा परीक्षण

वित्त मंत्रालय देखता है कि प्रत्येक विभाग कितना पैसा खर्च कर रहा है, और तय करता है कि प्रत्येक विभाग को कितना पैसा देना चाहिए। अगर विभाग और पैसा खर्च करना चाहता है तो वित्त मंत्रालय अपनी खर्च सीमा को कम कर सकता है। लेकिन वित्त मंत्रालय विभाग से बात करने और उससे संबंधित अन्य विभागों से बात करने के बाद ही यह निर्णय लेता है। अगर कैबिनेट वित्त मंत्रालय के फैसले को मंजूरी दे देती है तो बजट पूरा हो जाता है। इसके बाद मंत्री मंडल के पास स्वीकृत होने जाता है 

4. मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार करना 

वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री अन्य कैबिनेट सदस्यों के साथ मिलकर बजट की जांच करते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि कौन सी नीतियां (Policy) वित्त और राजस्व से संबंधित है। इस प्रक्रिया को “बजट प्रस्तुत करना” कहा जाता है। बजट को पूरे कैबिनेट सदस्यों के साथ मिलकर बनाया जाता है, फिर इसे संसद में पेश किया जाता है।

5. संसदीय प्रक्रिया 

भारत के संविधान में कहा गया है कि सरकार पहले संसद से अनुमोदन (Approval) प्राप्त किए बिना पैसा खर्च नहीं कर सकती है। और इसे फरवरी की शुरुआत में संसद में प्रस्तुत किया जाता है। संसद के पास बजट पर विचार करने के लिए कुछ हफ्ते का ही समय होता है, और फिर वह उसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजती देती है। एक बार जब राष्ट्रपति बजट को मंजूरी दे देते हैं, तो यह प्रभावी हो जाता है।

FAQ – Budget in Hindi

बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी कौन देखता है?

संसद में पेश किए जाने तक सरकार का बजट एक गुप्त दस्तावेज होता है। जब तक इसे प्रस्तुत किया जाता है, तब तक इसके बारे में सभी जानकारी गुप्त होती है। हालांकि, आप शायद जानते होंगे कि बजट को सबसे पहले देखने वाला पहला व्यक्ति कौन है: वित्त मंत्री। 

बजट के कितने चरण होते हैं?

पहले चरण में बजट की रूपरेखा तैयार की जाती है। दूसरे चरण में बजट के लिए दस्तावेज तैयार किया जाता है। तीसरे चरण में, बजट को अनुमोदन के लिए संसद में लाया जाता है। चौथे चरण में बजट लागू किया जाता है और पांचवें चरण में वित्तीय रिपोर्ट बनाई जाती है।

भारत की पहली महिला वित्त मंत्री कौन है?

निर्मला सीतारमण भारत की वित्त मंत्री के रूप में सेवा करने वाली पहली महिला हैं। 

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